करता रक्षा भारत की सरहद
करता रक्षा भारत की सरहद
पर डाले डेरा वह नौजवान है मेरा।
जब शत्रु दल धोखे से
भारत पर चढ़कर आया।।
निर्भय होकर सीना ताने
जा करके टकराया।
समरांगण में कूद पड़ा देखा
ना शाम सवेरा ।।१।।
सच्चा सैनिक वीर दिखायें रण
में अजब तमाशा।
टैंक विमानों को तोड़ा था
जैसे कोई बतासा।
कभी न माने हार शत्रु का रण में
खून बखेरा ।।२।।
भूख प्यास सर्दी गर्मी से
तनिक ना घबराये।
भारत का प्यारा रखवाला
देश की शान बढ़ाये।
दुश्मन सारे दहलते है
नाम सुने जब तेरा।।३।।
सीमा पर मनती है !
तेरी होली और दिवाली।
कहे “स्वरूपानन्द’ वीर
तू देश का है रखवाली।
राष्ट्र सुरक्षा तेरे दम पर रहे
लगाता फेरा।।४।।










