काम से उत्पन्न हुये व्यसन
काम से उत्पन्न हुये व्यसन
ऋषि दस बतलाते हैं,
इनसे रहना दूर जो सुख से
जीना चाहते हैं।
प्रथम जूआ चौपड़ तास,
दूसरा दिन में सोना ह्रास,
तीसरा काम कथा विलास
सुनते व सुनाते हैं।।1।।
चौथा पर निन्दा करना,
पाँचवा विषय भोगों पै मरना,
छठा मादक द्रव्य चरना,
सातवाँ गाते बजाते हैं।।2।।
आठवां वृथा इधर, उधर,
कामुक बन घूमे दिन भर,
नौवां नाच नाच कर नर
नारी को रिझाते हैं।।3।।
दसवां अश्लील दृश्य दर्शन,
इससे होवे दूषित मन, ‘प्रेमी”
सज्जन जन दुरव्यसनों को ठुकराते हैं,
इनसे रहना दूर जो सुख से
जीना चाहते हैं।।4।।










