कैसे करूँ यकीन कृष्ण सब बातें थोती तेरी।
हो गई चकनाचूर मुझे
जो तेरे से थी अभिलाषा।
मेरी समझ में नहीं आती है
तेरे धर्म की परिभाषा ।।
कैसे करूँ यकीन कृष्ण
सब बातें थोती तेरी।
धर्म के विरूद्ध आचरण है
यह लिपा पोती तेरी।।
जो नहीं करने थे पांडवों से
वह कर्म करवा डाले।
छल परपंच कपट से
सब धार्मिक योद्धा मरवा डाले।
पाप से घट भरवा डाले,
फिरै निन्दा होती तेरी।।1।।
लाखों बहनें बिन भाई के,
माता पुत्र विहीन करी।
लाखों विधवा फिरै
बिलखती बेचारी पराधीन करी।
सबकी मति मलीन करी,
यूँ जान को रोती तेरी । ।2।।
तेरी काली करतूतों से
उजड़ गये बसे ग्राम नगर।
सारा देश वीरान हुआ है,
घोर अंधेरा पृथ्वी पर।
और भी जो करना सो कर,
स्वीकार चुनौती तेरी।।3।।
क्या तुझको मालूम नहीं है,
रक्त सिन्धु में लाश तिरै।
प्रेमी पीड़ित दुखित जनता
पर आपत्ति के पहाड़ गिरै।
अनाथ युवा विधवायें फिर
इज्जत को खोती तेरी।।4।।
गांधारी ने कृष्ण से बढ़ा दई तकरार।
धृतराष्ट्र श्री कृष्ण से बोले इस प्रकार ।।










