कहीं सागर कहीं पहाड़, जहाँ जीवन की बहती धार

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कहीं सागर कहीं पहाड़, जहाँ जीवन की बहती धार

तर्ज: मेरे पिया गए रंगून

कहीं सागर कहीं पहाड़, जहाँ जीवन की बहती धार
प्रभु तेरी याद दिलाती है, तेरी महिमा समझाती है ॥ प्रभु तेरी…

नभ में रवि शशि तारे बहुत चमकाए (2)
सब एक स्वर से महिमा तेरी प्रभु गाए (2)
तेरे दान का खुला है द्वार, तू देता बिन माँगे हरबार ॥ प्रभु तेरी…

तू सर्वकाल और सबके मनों का ज्ञाता (2)
तू शरणागत के कष्ट दुःखों का त्राता (2)
तू सर्वेश्वर सर्वान्तयामी, तू ही सर्वाधार ॥ प्रभु तेरी…

तेरे गुण गौरव के गीत प्रभु मैं गाऊँ (2)
इतनी शक्ति दो मार्ग तेरे चल पाऊँ (2)
नैया के तुम पतवार लगाते पार, हो जब मँझधार ॥ प्रभु तेरी…

(सर्वकाल) तीनों काल (ज्ञाता) जाननेवाला (त्राता) दूरकरनेवाला (सर्वान्तरयामी) सबके हृदयों को
जाननेवाला