कई जन्मों से कृपा तू ही किए जाता है

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कई जन्मों से कृपा तू ही किए जाता है

तर्ज: मेरी आँखों से कोई नींद लिए जाता है

कई जन्मों से कृपा तू ही किए जाता है
मैं सदा तुझसे ही मागू तू मेरा दाता है ॥ मैं सदा ॥

गीत तेरे गाएँगे हम बैठे चरणों में भगवन्

तेरी छाया में रहें और करें खुद को अर्पण
मन तेरे प्रेम का अनुभाव लिए जाता है ॥ मै सदा ॥

प्रीत जो प्रभु से लगी जा के अन्तर में जगी
ध्यान जब उसमें लगा मन में एक ली सी जली

ये हृदय तेरा ही उपजाप किए जाता है ॥ मै सदा ॥

ज्ञान से जागे ये मन ध्यान से होवे चिन्तन
मन चित्त वश में होवे क्यों न होवें प्रभु के दर्शन

तेरा अनुभाव ही मतिमाह किए जाता है ॥ मै सदा ॥

साँस और धड़कन मेरी ओ३म् नाम बोल रही

ओ३म के रंग में रंगी घट घट डोल रही

ओरम् का ध्यान ही उमाह दिए जाता है ॥ मै सदा ॥

(अनुभव) प्रभाव, संकेत, तेज, महात्म्य (उपजाप)मौन जाप (मतिमाह) मतिवान, बुद्धिमान (उमाह) तरंग, लहर