जो वेदों की शिक्षा पे हम सब चलेंगे
तो निश्चय ही हम सच्चे आर्य बनेंगे ॥
न पूरब न पश्चिम न उत्तर न दक्षिण
अमंगल कहीं ना हो मंगल हो निशदिन
जो ईर्ष्या और द्वेषों से बचके चलेंगे ॥ तो निश्चय…
विभिन्न बोलियाँ है, विभिन्न धर्म प्रेमी
बने इस धरा के सभी मातृप्रेमी
वेद आज्ञा से हम भूमि-पुत्र बनेंगे ॥ तो निश्चय…
परस्पर क्यूँ हर राष्ट्र नीचा दिखाएँ
इन घातक शस्त्रोंकी क्यूँ होड़ लगाएँ
वेदों की अहिंसा उजागर करेंगे ॥ तो निश्चय…
धनुष कोटियों पे जो डोर चढ़ाई
न उसमें कभी भी किसी की भलाई
अहिंसा अमन एकता पर जिएँगे ॥ तो निश्चय…
लड़ाई से ना है समाधान कोई
हिंसाओं ने देशों की नावें डुबोई
जो चाहोगे संग्राम क्यूँ ना मिटेंगे ॥ तो निश्चय…
अगर आक्रमण हो तेरी इस धरा पर
तो पीछे ना हटना कभी घबराकर
धर्महित मरें वो अमर ही रहेंगे ॥ तो निश्चय…
शक्तिधर ऐ मानव तू मद में न आना
न मासूम लोगों का जीवन मिटाना
सशक्त भी चाहें तो शिव ही बनेंगे ॥ तो निश्चय…
संहारक न बन, बन तू प्रेम-उपासक
एकता मित्रता का सदा कर तू स्वागत
हर राष्ट्र के मोती इक सूत्र में होंगे ॥ तो निश्चय…
सभी शक्तियों के हैं ईश ही प्रेरक
तू वन लोक-रक्षक न बन जाना भक्षक
अहिंसा से तो राष्ट्र स्वर्ग बनेंगे ॥ तो निश्चय…
सदा एकता ही बने सुख की वर्षक
अग्निसम प्रकाशित और यश की वर्धक
इन आत्मिक ऐश्वर्यों को पाते रहेंगे ॥ तो निश्चय…
समिति एक हो एक मन एक चित्त हो
ये जग एकता से सदा जागृत हो
इसी मंत्र से सोए लोग जगेंगे ॥ तो निश्चय…
दृष्टि में हमारी सदा मित्रता हो
हृदय में कभी द्वेष ना शत्रुता हो
इन सात्विक भावों को हृदय में भरेंगे ॥ तो निश्चय…
धरा पर रहें, चाहे कोई दिशा में
परस्पर सदा प्रेम होवे जिया में
सदा प्रेम सत्कार स्वागत करेंगे ॥ तो निश्चय..
वैदिक भावना मिलके मन में जगाओ
चलो मिल के बोलो गाओ मन सजाओ
तभी ईर्ष्या, द्वेष, विध्वंस मिटेंगे ॥ तो निश्चय…
(घातक)हत्यारा, चोट पहुँचाने वाला (धनुषकोटि) धनुष की रस्सी (अमन) शान्ति, चैन (समाधान)
निबटारा, समर्थन (संग्राम) युद्ध (समिति) समाज (सात्विक) सत्वगुण प्रधान (विध्वंस) नाश, वैर










