जीवन बीत रहा पल-पल में, किसे पता है, कौन जगे ना

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वैराग्य

जीवन बीत रहा पल-पल में।
किसे पता है, कौन जगे ना,
आने वाले कल में।।

महाकाल विकराल खड़ा है,
अपना फंदा डाल खड़ा है।
कौन बचा है कौन बचेगा,
मृत्यु की हलचल में।।
जीवन बीत रहा पल-पल में, किसे पता है…..

भरत कहाँ है राम कहाँ है,
धर्मराज घनश्याम कहाँ है।
है कोई उनका पता बताए,
सारे भूमण्डल में।।
जीवन बीत रहा पल-पल में, किसे पता है….

टिम-टिम करते नभ में तारे,
छुप जाऐंगे इक दिन सारे।
नहीं बिजुरिया चमकेगी इस,
काले से बादल में।।
जीवन बीत रहा पल-पल में,
किसे पता है…..

मोह माया में भटक रहा है,
किस उलझन में अटक रहा है।
फँसा दिया ‘बेमोल’ ये जीवन,
दुनियाँ की दलदल में।।
जीवन बीत रहा पल-पल में, किसे पता है…..