तर्ज – दुश्मन ना करे दोस्त ने
ज़िन्दगी में, पाप के ना काम किया कर।
रोज़ नेक कर्म, सुबह शाम किया कर।।
अब आखरी में और मैं,
क्या-क्या मिसाल दूँ सचिन ‘सारंग’,
ईश को प्रणाम किया
कर रोज़ नेक कर्म,
सुबह शाम किया कर ज़िन्दगी में……….
कर ले भला होगा भला,
ये बात सही है ये जन्म हीरा,
यूँ ना बदनाम किया कर रोज़ नेक कर्म,
सुबह शाम किया कर ज़िन्दगी में……
नेंकी से सींच ले अरे,
जीवन की क्यारियाँ बदियों की गोदी,
में ना आराम किया कर रोज़ नेक कर्म,
सुबह शाम किया कर ज़िन्दगी में……
वैसे तो इस जहान में,
सब जीव जी रहे पर जीने का तू,
कुछ तो इन्तजाम किया
कर रोज़ नेक कर्म,
सुबह शाम किया कर ज़िन्दगी में……










