जीता हूँ जिसके लिए,जिसके लिए मरता हूं ।
जीता हूँ जिसके लिए,
जिसके लिए मरता हूं ।
एक ऐसा ईश्वर है,
जिसे मैं ध्यान करता हूं ।।
सारे जहां का वो तो है मालिक,
सबमें समाया है वो…
सब प्राणियों का वो तो है दाता,
पालन भी करता है वो…
जाने कहाँ है किसी को न पता,
‘ वह व्यापक निराकार है,
जिसे मैं जाप करता हूं ।।१।।
एक ऐसा ईश्वर है।
सुरज-चन्द्रमा, पर्वत-नदियाँ,
उनके ही कारीगरी। बिना किसी के
सहायता से करते हैं रचना सारी ।।
वो परम दयालु, वो आनन्द दाता,
वो ही आनन्दस्वरूप है, जिसे मैं
चिन्तन करता हूं।।२।।
एक ऐसा ईश्वर है…।।
जिसने दिया है नर चोला हमको,
उसको हम भक्ति करें ।
भक्ति से हमको शक्ति मिलेगी,
मुक्ति पाने के लिए ।।
वो ही माता-पिता, वो ही बन्धु-सखा ।
मैं उस परमपिता को,
सुबह शाम याद करता हूं ।
एक ऐसा ईश्वर जिसे मैं
ध्यान करता हूं ।।३।।










