जवानो जवानी में,चलना संभल के
जवानो जवानी में,
चलना संभल के,
आती नहीं ये,
दुबारा निकल के।
कठिन है जवानी
की मंजिल ये प्यारो
कभी लड़खड़ा जाओ
कुछ दूर चल के।
विषय रूपी रहजन,
अनेकों मिलेंगे
खबरदार कोई न,
ले जाए छल के।
सुधर जाए परलोक,
जिससे यत्न कर
जब आयेगी मृत्यु,
न जायेगी टल के।
“वीरेन्द्र” न दिल है,
लुटाने की वस्तु
लुटाया यह जिसने,
रहा हाथ मलके।










