सत्संग
जहाँ सत्संग होता है,
वहाँ पर नित्य जाओ तुम।
हमें फुरसत नहीं कहकर,
यह मौका मत गंवाओं तुम।
अरे सत्संग करने की,
ना कोई उम्र होती है,
अमर ये दीप है इसकी,
कभी बुझती ना ज्योति है,
इसी ज्योति से जीवन की,
सदा ज्योति जलाओ तुम।
जहाँ सत्संग होता है……..
जरा अनुभव कर देखो,
कि क्या बदलाव आया है,
कपट सब दूर होता है,
हृदय निर्मल हो जाता है।
इन्हीं सत्संगियों के संग,
सदा जीवन बिताओ तुम।
जहाँ सत्संग होता है………
करके एकाग्र मन को तुम,
जाके सत्संग को सुनना।
होके तल्लीन भावों के,
सुनहरे फूलों को चुनना।
इसी सत्संग सागर में,
सदा डुबकी लगाओ तुम।
हमें फुरसत नहीं कहकर,
यह मौका मत गंवाओ तुम ।।
जहाँ सत्संग होता है………
चढ़े इक बार ना फिर उतरे,
सत्संग का ये रंग।
बिना प्रभु की कृपा मिलता नहीं
सत्संगियों का संग।
गुरु संतों की सेवा कर,
सदा सान्निध्य पाओ तुम।
जहाँ सत्संग होता है,
वहाँ पर नित्य जाओ तुम।
हमें फुरसत नहीं कहकर,
यह मौका मत गंवाओं तुम।










