जाग रे मेरे मन, गाले प्रभु के गुण

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जाग रे मेरे मन, गाले प्रभु के गुण

जाग रे मेरे मन, गाले प्रभु के गुण
क्या पता ये जीवन, रहे ना रहे
रहे ना रहे
जाग रे मेरे मन, गाले प्रभु के गुण
जाग रे मेरे मन,
गाले प्रभु के गुण

दाता वृष्टि, सुख की बरसाये
सुखों की बरसाये
ध्याये वही पाये, सच्चिदानन्द
सच्चिदानन्द
जाग रे मेरे मन, गाले प्रभु के गुण

जीवन नैया, प्रभु तू तारे
प्रभु तू तारे
माँझी तू मेरा, मैं तेरे सहारे
तेरे सहारे
जाग रे मेरे मन, गाले प्रभु के गुण

ज्योति सत्य की प्रभु, तुमसे ही पाई
तुमसे ही पाई
जलती रहे सदा, तेरे सहारे सदा
तेरे सहारे
जाग रे मेरे मन, गाले प्रभु के गुण
क्या पता ये जीवन,
रहे ना रहे
रहे ना रहे
जाग रे मेरे मन, गाले प्रभु के गुण

आत्मा बने ज्ञानी, प्रीत जो प्रभु से जोड़ी
प्रभु से जोड़ी
प्रीत लगा के बैठा, रहूँ तेरे द्वारे
रहूँ तेरे द्वारे
जाग रे मेरे मन, गाले प्रभु के गुण

व्याकुल मन से, आस लगाई तेरी
आस लगाई
ध्यान में रहूँ तेरे, साँझ सकारे
साँझ सकारे
जाग रे मेरे मन, गाले प्रभु के गुण

वेदामृत की, चाह जगाई
चाह जगाई
आनन्द रस दे, प्रीतम प्यारे
प्रीतम प्यारे
जाग रे मेरे मन, गाले प्रभु के गुण

जाग रे मेरे मन, गाले प्रभु के गुण
क्या पता ये जीवन, रहे ना रहे
रहे ना रहे
जाग रे मेरे मन, गाले प्रभु के गुण

रचनाकार :- पूज्य श्री ललित मोहन सहानी जी – मुम्बई
स्वर :- श्रीमती अदिति जी शेठ
तर्ज :- आवडे हे रूप गोजिरे सगूण
पाहता लोचन स्थिरावले
राग :- भीम पलासी ? यमन (कल्याण)