प्रभु मेरे जीवन को जीना सिखा दो,गमों को खुशी से पीना सिखा दो |
इस जीवन के चौराहे पर
कितनों से मेल मिलाप हुआ
कितनों से मिले मजबूरी में
कितनों से अपने आप हुआ
कुछ से मिल के तो खुशी हुई
कुछ से मिल सन्ताप हुआ
जिनसे मिलना था उनसे मिल न सके
इसी लिए तो पश्चाताप हुआ
प्रभु मेरे जीवन को जीना सिखा दो
गमों को खुशी से पीना सिखा दो
तन ये प्रभु जी तुम्हारा शिवाला
धधगती हृदय में तुम्हारी ही ज्वाला
ज्वाला को भक्ति का प्याला पिला दो
गमों को खुशी से पीना सिखा दो
प्रभु मेरे जीवन को जीना सिखा दो
गमों को खुशी से पीना सिखा दो
मन को न घेरे – विकारों की बातें
सदा ही चलें – संस्कारों की बातें
संस्कारों का ऐसा दर्पण दिखा दो
गमों को खुशी से पीना सिखा दो
प्रभु मेरे जीवन को जीना सिखा दो
गमों को खुशी से पीना सिखा दो
सत्संग में मन को – अपने लगाऊँ
तेरी कृपाओं का गुणगान गाऊँ
“विजय” प्रेम से मन का दीपक जला दो
गमों को खुशी से पीना सिखा दो
प्रभु मेरे जीवन को जीना सिखा दो
गमों को खुशी से पीना सिखा दो










