इस आर्यावर्त में अगर वेदों का मान होता
इस आर्यावर्त में अगर
वेदों का मान होता,
काहे को नाम इसका
फिर हिन्दोस्तां होता।
आर्यों से नाम होता
फिर क्यूं गुलाम हिन्दू,
हिन्दू के अर्थ का कुछ
अगर हमको ज्ञान होता…।
क्यूं सिफ्त पाती इतनी
मोटर व रेलगाड़ियाँ यहां
भोज का अगर वो
विचित्र यान होता…।
ईश्वरोक्त वेद पाठन
की रीत होती जारी,
फिर क्यों पुराण होते
और क्यों कुरान होता ….।
वायुयान में यक्ता होते
विदेश वाले विश्वकर्मा का
अगर पुष्पक विमान होता ….।
ऐ वीर ऋषि दयानन्द आते
अगर यहां न चोटी जनेऊ
का यहां नहीं नामोनिशान होता ।










