“धर्मो यस्य स जीवति !”
(जिसके जीवन में धर्म है, वही वास्तव में जीवित है।)
परिचय
स्थान: कंधार, हैदराबाद
संलग्नता: स्टेट कांग्रेस, धर्मप्रेरित सत्याग्रही
बलिदान तिथि: 8 अप्रैल 1939
स्थान: निजामाबाद जेल
जीवन और योगदान
श्री व्यंकटराव जी एक सच्चे देशभक्त और धर्मनिष्ठ सत्याग्रही थे। उन्होंने हैदराबाद स्टेट में हो रहे अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध अपनी आवाज़ उठाई। स्टेट कांग्रेस के माध्यम से उन्होंने सत्य और न्याय की स्थापना के लिए आंदोलन किया।जब उन्होंने सत्याग्रह किया, तब उन्हें जेल भेज दिया गया। वहाँ भी उन्होंने अत्याचार के विरुद्ध न झुकने का संकल्प निभाया।
बलिदान
निजामशाही की जेलों में सत्याग्रहियों पर होने वाला अत्याचार अत्यंत क्रूर था। श्री व्यंकटराव जी को भी जेल में अमानवीय मारपीट का सामना करना पड़ा। अंततः 8 अप्रैल 1939 को निजामाबाद जेल में उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी।
श्रद्धांजलि
हुतात्मा व्यंकटराव जी का बलिदान हमें यह सिखाता है कि
“धर्म, न्याय और स्वतंत्रता के लिए प्राणों का उत्सर्ग ही सच्ची वीरता है।”
उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को सत्य और साहस के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।










