“हृदय में समा जा,प्रभु मेरे प्यारे” एक ईश्वर भक्ति गीत

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ओ३म् न स स्वो दक्षो॑ वरुण॒ ध्रुति॒: सा सुरा॑ म॒न्युर्वि॒भीद॑को॒ अचि॑त्तिः ।
अस्ति॒ ज्याया॒न्कनी॑यस उपा॒रे स्वप्न॑श्च॒नेदनृ॑तस्य प्रयो॒ता ॥
ऋग्वेद 7/86/6

हृदय में समा जा,
प्रभु मेरे प्यारे
तेरे बिन जिऊँगा – किसके सहारे?
प्रेम से हूँ गदगद – दरस दिखा दे
देख रहा हूँ प्रतिभा – साँझ सकारे
सदा तुम हमारे

पाप के हैं छ: कारण,
दुःखी करते रहते
तुझसे मैं चाहूँ बल,
कमी दूर कर दे
अनन्य गुणों के पय – मुझको पिला दे
तेरे बिन जिऊँगा – किसके सहारे
सदा तुम हमारे

‘ध्रुति’ छोड़ आत्म निरीक्षण करूँगा
बुरे कर्म त्याग के – पवित्र बनूँगा
दृढ़ता व स्थिरता, मन की करा दे
तेरे बिन जिऊँगा – किसके सहारे
सदा तुम हमारे

‘अचित्ति’ है कारण, पापों के मूल का
अज्ञान-अल्पज्ञान, कारण है भूल का
दूर अचित्ति कर – सत्यज्ञान बढ़ा दे
तेरे बिन जिऊँगा – किसके सहारे
सदा तुम हमारे

स्वप्नरूपी आलस से, बेहोशी का दु:ख है
निपुणता सतर्कता – जागृति विमुख है
पाप का जो है कारण, प्रमाद हटा दे
तेरे बिन जिऊँगा – किसके सहारे
सदा तुम हमारे

लोभ मोह काम भय शोक ईर्ष्या विकार
क्रोध जिसका उपलक्षण , निम्न है आचार
विचार विकार शून्यता प्रभु तू जगा दे
तेरे बिन जिऊँगा – किसके सहारे
सदा तुम हमारे
हृदय में समा जा,
प्रभु मेरे प्यारे
तेरे बिन जिऊँगा – किसके सहारे?
प्रेम से हूँ गदगद, दरस दिखा दे
देख रहा हूँ प्रतिभा – साँझ सकारे
सदा तुम हमारे