आस्था
हे निराधार, हे सर्वाधार, अधिकार तुम्हारे हाथों में।
सृष्टि कर्त्ता, पालन कर्त्ता, संहार तुम्हारे हाथों में ।।1।।
हे सर्वेश्वर, हे योगेश्वर, हे ज्ञानेश्वर, हे प्राणेश्वर।
भक्ति मुक्ति शक्ति सब कुछ, दातार तुम्हारे हाथों में ।।2।।
हम दीन हैं तुम दीनन बन्धु, हम बिन्दु हैं तुम हो सिन्धु।
दुःख दूर करो सन्तान हरो, उद्धार तुम्हारे हाथों में ।।3।।
जीवन नैय्या मझधार में है, चाहो तो पार लगा देना।
इस पार करो उस पार करो, पतवार तुम्हारे हाथों में ।।4।।
हम तुमको कभी-कभी भजते, पर तुम तो कभी नहीं तजते।
हे उपकारी उपकार करो, उपकार तुम्हारे हाथों में ।।5।।
उद्धार हमारा निश्चय है, करतार तुम्हारे हाथों में।
हे निराधार, हे सर्वाधार, अधिकार तुम्हारे हाथों में ।।6।।










