हे अग्ने

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प॒दं दे॒वस्य॒ नम॑सा॒ व्यन्तः श्रव॒स्यवः श्रव॑ आप॒त्रम॑क्तम् ।

नामानि चिद्दधिरे य॒ज्ञियानि भुद्रायां ते रणयन्तु संदृष्टौ ॥ ऋ. ६.१.४

तर्जः तेरी वन्नु मुगिले मळ तूवलम करमो

हे अग्निदेव कल्याण प्रदाता
तुम्हारी महिमा को विश्व गाता॥
तुम्हारे चरणों का दर्श है पाया (2)
मन स्तुतियों से सुहाया (2)
सुखदायक तू दुःख विदारक (2)
तव दया पात्र बनाया
बाह्य यशों की नहीं आकांक्षा
अन्तर यश उपजाता
हे अग्निदेव !…

केवल तेरे नामों का धारण (2)
वाणी पावन करता (2)
भावभरित तव नाम जपन से (2)
शुद्ध हृदय बन जाता
तव कल्याणमयी दृष्टि ही
सुख निर्विघ्न बढ़ जाता॥
हे अग्निदेव !…

इसलिए हे अग्ने! परमेश्वर !
प्रेम का मार्ग दिखाओ आदि
से अन्त तलक ये मारग
शुभ ही चलना सिखलाओ
तेरा दर्शन यश है अनश्वर
यश है तेरी कृपा का॥

(आकांक्षा) चाह, इच्छा। (विदारक) फाड़ देने वाला।