हाय ये कैसी अविद्या भूली हो अपना पतिव्रत ।
हाय ये कैसी अविद्या
भूली हो अपना पतिव्रत ।
अपने पति को दी सौ-सौ गाली,
स्याने दिवानों को झुक-२ सलाम।
अपने पति को न बनती रोटी,
पीरों फकीरों को बर्फी बादाम।
अपने देवों की तो सार न जानो
भूत प्रेतों को मानो तमाम।
अच्छी कथाओं से सौ कोस
भागो मेले तमाशों में चार मुकाम।
पाठक कहे देव पति तुम्हारे
उनके चरण धोओ सुबह व शाम।










