हर पल में हो प्रभु सुमिरन तेरा
हर पल में हो प्रभु सुमिरन तेरा,
ऐसा बना दो प्रभु जीवन मेरा।
याद तेरी को मैं सदा दिल में बसाऊँ,
आठो पहर प्रभु तेरे गीत गाऊँ।
नाम तेरा ही होवे सच्चा धन मेरा ।।
ऐसा बना……..
ख्वाहिशे जगत की न मुझको सताएँ,
चिन्ताएँ हरगिज न नजदीक आऐं।
करता रहूं प्रभु चिन्तन तेरा ।।
ऐसा बना……..
जग में रहूं पर जग से आजाद रहूं,
तेरे बिना और किसी का न मोहताज रहूं।
तेरे चरणों में सदा लगे मन मेरा ।।
ऐसा बना……..
तेरी याद में हम ऐसे खो जाए,
मैं न रहूं बस तू ही तू रह जाए।
सफल हो जाए यह नर तन मेरा ।।
ऐसा बना………
वह आँख ही क्या जिन आँखों
को असली नकली का ज्ञान नहीं।
वह कान ही क्या जिन कानों को
दुःखियों के रूदन का ध्यान नहीं।
वह हाथ ही क्या जिन हाथों ने किया
शुभ कर्मों में दान नही।
यह रसना क्या, जिस रस
रसना ने किया प्रभु गुणगान नहीं।










