हमारे रिश्तों की व्याख्या

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[1] :- माँ बाप को सिर ऊंचा करके जीने दें, उसे ” संतान ” कहते हैं।

[2] :- संकट में कंधे से कंधा मिलाकर चले, उनका नाम ” भाई ” है।

[3] :- सदा सुख दुःख में भागीदार और निर्धनता, तंगी में भी साथ निभाएं, उसका नाम “धर्म पत्नी”

[4] :- कम या ज्यादा देने पर भी जो संतोषी बन कर खुश हो जाएं, उसका नाम ” बहन, बेटी “

[5] :- चाहे जितने मतभेद हो जाए फिर भी साथ बैठकर जो विवाद को समाप्त कर दे, सुधार दे, उसका नाम ” कुटुम्ब “

[6] :- किसी भी तरह के संकट या दुःख में साथ निभाएं, उसका नाम ” सम्बन्धी “

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[7] :- विप्रित परिस्थितियों में, सहयोग दें उसका नाम है “दोस्त”

[8] :- अंदर ही अंदर पांव न खींचकर बाहर के संकट में एक होकर साथ निभाएं, उसका नाम ही ” समाज “

[9] :- अन्य धर्मों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करे उसे कहते हैं “धर्म”