गूंज रही है आज दिशाएं गूंज रहा ये चमन है ।
तर्ज: ऋषि के तरानें में सुनें
गूंज रही है आज दिशाएं
गूंज रहा ये चमन है ।
क्रांति दूत हे दयानन्द
तुम्हे सौ सौ बार नमन है ।।
नाम तुम्हारा रहेगा जग में
जब तक चाँद गगन है ।
क्रांति दूत हे दयानन्द
तुम्हे सौ सौ बार नमन है ।।
सच्चे शिव की खोज में ही
तुमने सर्वस्व लगाया था ।
तुमने वेदों की वाणी का
अमृत हमें दिलाया था ।।
तुमने सब सुख छोड़ दुखों को
अपने गले लगाया था ।
अध्ंकार में आशाओं का
तुमने दीप जलाया था ।।
आज तेरे आदर्शो पर
नतमस्तक तेरा वतन है ।
क्रंाति दूत हे दयानन्द
तुम्हे सौ सौ बार नमन है ।।
राह दिखाई तुमने हमको
उस पर सदा चलेगे हम ।
जिन सपनों को छोड़ गए
उनको साकार करेंगे हम ।।
कितने ही तूफान उठे पर
उनसे नहीं डरेंगे हम ।
मातृ भूमि की बलिवेदी पर
सौ सौ बार मरेंगे हम ।।
कोटी – कोटी मानव करते
नत होकर तुम्हे नमन है ।
क्रांति दूत हे दयानन्द
तुम्हे सौ सौ बार नमन है ।।










