गायक गुणी कवि शायर ना राग रागिनी गाता हूँ।

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गायक गुणी कवि शायर ना राग रागिनी गाता हूँ।

गायक गुणी कवि शायर
ना राग रागिनी गाता हूँ।
यह मानव-मानव बन जाए
मैं ऐसा राग सुनाता हूँ।।

१ हिन्दू, मुस्लिम, सिख, जैन,
ईसाई नहीं बनाता हूँ।
मैं सत्य सनातन वैदिक
धर्म का जग को पाठ पढ़ाता हूँ।।

२. ब्रह्माण क्षत्री, वैश्य,
शूद्र को निज कर्त्तव्य बताता हूँ।
लोगों के सोये हुए पुनः
मैं शुम संस्कार जगाता हूँ।।

३. मूले जो ‘नरदेव सत्यपथ
अन्धकार में फंस कर के।
दिखलाता उनको सही
मार्ग में वैदिक दीप जलाकर के ।।