गाएजा गाएजा गाएजा ॥
गाएजा गीत प्रभु के, गाएजा, गाएजा गाएजा…
स्वर्णिम, प्रभात आया मन काहे सो रहा है
जीवन के इन क्षणों को बेकार खो रहा है
भटकेगा कोई कब तक बेआस बेसहारे
संदेश दे रहे हैं, रवि चन्द्र और सितारे गाएजा गाएजा…
खोया है तूने बचपन क्यों खो रह जवानी
सिमरन तू कर प्रभु का, दी जिसने ज़िन्दगानी
बहने दे अपनी नैया, प्रभु नाम के सहारे
संदेश दे रहे है योगी ऋषि हमारे गाएजा गाएजा….
(चातक) स्वाति नक्षत्र के जल की एक बूँद का प्यासा पक्षी
तर्ज :
आएगा, आएगा आएगा आएगा आनेवाला
मेरे हृदय में प्रभुजी तुमको समीप पाऊँ
माँगूँ क्या मैं तुमसे ? तुमको तुम्हीं से पाऊँ
ऐसे में तेरी चाहत इस तरह आ रही है
चातक हो जैसे प्यासा निज प्यास मैं बुझाऊँ
सौ बार जन्म मिले तो, तेरे ही गीत गाऊँ ॥










