दिवस आज का धन्य आनन्दकारी।
दिवस आज का
धन्य आनन्दकारी।
मुदित हो रहे हैं,
सकल नर व नारी ।।
पवन अति सुगन्धित
चतुर्दिक् चली है।
प्रफुल्लित हुयी बाग
की हर कली है।।
कुहुकती है कोयल
मधुर डारी-डारी।।
दिवस आज० प्रणय
सूत्र में दो मधुर मन बँधे हैं।
नियम पूर्वक वर-
वधू ये बने हैं।।
निभायेंगे निज रीति
मर्याद सारी ।।
दिवस आज० बने आर्य
मतिमान् धन धाम पावें।
करें कर्म नीके सदा यश कमावें ।।
मिले योग्य सन्तान प्यारी दुलारी।।
दिवस आज० बहे जब
तलक गंगा-यमुना में पानी।
‘प्रकाशार्य तब तक
जियें दोनों प्राणी ।।
यही कामना ईश से है हमारी।।
दिवस आज०










