ध्यान में आए हृदय में समाए
आत्मा में कई निज रूप दिखाए
हर्षित हो मन प्रभु गुण गाता है
प्रभु चरणों में आनन्द आता है ॥ प्रभु चरणों में….
जलवायु पृथ्वी आकाश है
और अग्नि में तेरा प्रकाश है
हे पिता ! संसार की देख महिमा को, आनन्द पाया
वर्षा सुखों की तू बरसाता है ॥ प्रभु चरणों में….
कणकण में तेरा ही वास है
दूर सुदूर भी और पास है
प्रेरणा शुभ कर्म की
तेरी शरण में पाने लगा
जनम जनम प्रभु तुझसे ही नाता है ॥ प्रभु चरणों में…
तू मेरे जीवन का विश्वास है
मुझको तेरे दर्श की प्यास है
प्यार पिता का है
माता सी ममता देता है तू,
मित्र सखा गुरु, तू ही भ्राता है ॥ प्रभु चरणों में….
दीन हूँ, मैं तू दीनानाथ है
सत्य का मार्ग है तू साथ है
करो ज्योतिर्मय प्रकाशित मेरा
मन का ये दीपक
महाज्ञानी तू ही, ज्ञान का दाता है ॥ प्रभु चरणों में….
तर्जु: कुछ कुछ होता है










