“रक्तत्वं कमलानां सत्पुरुषाणां परोपकारित्वम्।।”
(कमल का गुण उसका रक्तवर्ण होता है, और सत्पुरुष का स्वभाव परोपकार होता है।)
श्री सदाशिवराव जी शोलापुर के तदोला ग्राम के निवासी थे। वे श्री विश्वनाथ राव के सुपुत्र थे। पिता की एकमात्र सन्तति थे। हिन्दू महासभा की तरफ से उन्होंने हैदराबाद राज्य में सत्याग्रह किया था। जेल में इनसे पत्थर ढोने का कठोर काम लिया गया। यह पुनाड़ा (मराठी भाषा का वीररस से युक्त काव्य) बड़ा अच्छा गाते थे। जेल कर्मचारी इन्हें गाने से रोका करते थे। इसलिये यह जहाँ सत्याग्रही काम करने जाते थे वहां तथा अपनी कोठरी में पुनाड़ा गाया करते थे।
पत्थर ढोने के कार्य से इन्हें ज्वर हो गया। ज्वर में इनका उचित उपचार न हुआ। इसके परिणामस्वरूप 13-8-39 को इनका जेल में देहावसान हो गया। धर्मवीर सदा के लिये शान्ति की नींद सो गया।










