धर्म वैदिक है हमारा
धर्म वैदिक है हमारा
आर्य प्यारा नाम है।
वेद के अनुसार सारा,
जग बनाना काम है ॥ १ ॥
ब्रह्म की पूजा करें भ्रम,
भेद दूजा दूर कर।
सच्चिदानन्दादि मङ्गल,
मूल अज अभिराम है ॥ २ ॥
‘वेद का पढ़ना-पढ़ाना,
परम पावन-धर्म है।’
सत्यविद्या का वही वर,
विश्वविद्या-धाम है ॥ ३ ॥
सत्य स्वीकृति, अमृत
त्यागन में, सदा उद्यत रहें।
धर्मनीति विचार से हो,
सर्वदा सब काम है ॥४॥
विश्व का उपकार करना,
मुख्य ये उद्देश्य है।
सर्व सामाजिक समुन्नति में
कभी न विराम है ॥५ ॥
विविध मत फैले हुए
करके सभी का सामना।
सत्य पर सबको चलावें,
धर्म का संग्राम है ॥ ६ ॥
वेदहित जीवन हमारा,
वेदहित मरना भला।
वेद-शाला शून्य कोई,
भी न होवे ग्राम है ॥७॥
वेद-‘सूर्य’ प्रकाश में,
ऋषि के प्रदर्शित पाथ में।
प्राण भी जावें चले,
पर धर्म में आराम है ॥ ८ ॥










