धर्म की रक्षा कौन करेगा
धर्म की रक्षा कौन करेगा, आर्य समाज।
देश के हित में कौन मरेगा आर्य समाज ॥ टेक ॥
मनुष्य वही जो मननशील परहित पहिचाने।
अपने जैसा दूसरों का भी सुख दुख जाने॥
अन्यायकारी बलवान से जो टक्कर लेता है।
निर्धन हर एक सत्यवादी को सुख देता है॥
दुखियों के दुख कौन हरेगा,
आर्य समाज॥1॥धर्म०
निर्बल महाअनाथ चाहे
गुणरहित हो कोई सत्यवादी।
उसकी रक्षा करे नीच दुष्टों की बर्बादी॥
जो हो अधर्मी चक्रवर्ती
सम्राट से भी टकराये।
जीव अमर देह नाशवान
फिर मौत से क्यों घबराये।
अन्याइयों से नहीं डरेगा,
आर्य समाज पद लोलुपता स्वार्थ कपट
जिनके है मन में ॥2॥ धर्म०
ऐसे धूर्तों का जीवन कटे पागलपन में।।
है वो अनार्य दुश्मन आर्य समाज को समझो।
अपयश का भागी है कोढ़ ये खाज में समझो॥
सर मुकुट झूठ का नहीं धरेगा,
आर्य समाज ॥3॥ धर्म०
ऋषि दयानन्द के दीवानों दो मेट पाप को।
लेखराम श्रद्धानन्द की सौगन्ध आपको॥
सौगन्ध स्वतंत्रानन्द दर्शनानन्द गुरुदत्त की।
सौगन्ध नरेन्द्र आर्य की और लाज के पथ की॥
‘कर्मठ’ पथ से नहीं टरेगा,
आर्य समाज ॥4॥ धर्म०










