धर ले रे ध्यान उसका,जिसने ये जग रचाया।

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धर ले रे ध्यान उसका,जिसने ये जग रचाया।

तर्ज – राह गर्दिशों में हरदम…….

धर ले रे ध्यान उसका,
जिसने ये जग रचाया।
मालिक है वो तेरा,
कण-कण में वो समाया।।

तुझको ये ऐश्वर्य,
जिसने ‘सचिन’ दिये हैं
दुनियाँ की उलझनों में,
फंसकर उसे भुलाया धर ले रे ध्यान……

रचना विशाल उसकी,
आँखों से देख ले तू तारों का जाल कैसे,
आकाश में बिछाया धर ले रे ध्यान……

कन्दराओं में वो मैंना,
क्या राग गा रही है सबका पिता प्रभु है,
गाकर हमें सुनाया धर ले रे ध्यान……

सत्यम शिवम् है वो ही,
वो ही है मोक्ष दाता कैसी है
उसकी लीला, कोई न जान पाया
धर ले रे ध्यान…….