देवी कागज के टुकड़े से कहने लगी
देवी कागज के टुकड़े से कहने लगी,
भूल जाना ना दर्दीली बातें मेरी,
मेरी माता से जा करके कह देना सब,
कैसे गुजरे हैं दिन दुख की रातें मेरी।। टेक ।।
करके शादी दहेज में लुटा करके घर,
समझे थे कि फर्ज सब अदा हो गये,
यह न किसी को भी मालूम था,,
मौत बन जायेगी सौगातें मेरी, ।।1।।
जिनको समझा था
मानव वह दानव बने,
नेक सुख जमाई कसाई हुआ,
ओर को दीखते हैं यह भव्य भवन,
पर मुझे दीखती हवालाते मेरी ।।2।।
जन्म देकर मेरा पालन पोषण किया,
जब बड़ी हो गई सौंप दी गैर को,
सबसे अच्छा यह होता कि अन्तिम समय,
अपने हाथों चिता को जलाते मेरी ।।३।।
एक शोला कलेजे से उठकर चला,
आंसू बनकर गिरा आंख से मेज पर,
मेरे वश का जो था वह सब कर चुकी,
खत्म अश्कों की अब वारदातें मेरी। ।4।।










