‘देख भाल के सोच समझ के अपना वक्त गुज़ारिए।

0
10

‘देख भाल के सोच समझ के अपना वक्त गुज़ारिए।

‘देख भाल के सोच समझ के
अपना वक्त गुज़ारिए।
शुभ गुण कर्मों व्यवहारों से
जीवन सदा संवारिए।’
देख भाल के सोच समझ के…

निन्दा चुगली की उलझन से
ख़ुद को सदा बचाना।
दुनियाँ के रगड़ों झगड़ों में
पड़कर मत रह जाना।
बे मतलब की चिन्ताओं का
सर से बोझ उतारिए।
देख भाल के सोच समझ के…

ऐसे बोलें बोल कि जैसे
अमृत ही बरसा हो।
बाहर वालों से भी हर
व्यवहार सदा घर सा हो।
मुख से निकलें वचन बाद
में पहले इन्हें विचारिए।
देख भाल के सोच समझ के…

सीमा से बढ़ने मत देना
निज आवश्यकताएँ ।
मेहनत करके जो मिल
जाए उसे बाँट कर खाएँ।
जितनी लम्बी चादर हो
उतने ही पैर पसारिए।
देख भाल के सोच समझ के…

जीत हार तो हर मानव के
जीवन में आती है।
ठोकर खाकर दिल वालों की
हिम्मत बढ़ जाती है।
मन्जिल तुम्हें ज़रूर मिलेगी
‘पथिक’ न हिम्मत हारिए।
देख भाल के सोच समझ के…..