महर्षि दयानन्द सरस्वती जी का 200वाँ जन्म शताब्दी समारोह

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महर्षि दयानन्द सरस्वती जी का 200वाँ जन्म शताब्दी समारोह

21.02.2024 से 25.02.2024

स्थानः – आर्य समाज सैक्टर 7 बी, चण्डीगढ़

कार्यक्रम

प्रातः कालीन कार्यक्रम 21.2.2024 से 25.2.2024

यजुर्वेदीय यज्ञ

  • प्रातः 7:30 से 9:00 तक यज्ञ, भक्तिमय भजन एवं प्रवचन

यज्ञ ब्रह्मा

  • वैदिक प्रवक्ता ए. (डॉ.) सुश्रुत सामश्रमी

यज्ञ संयोजक

  • आ. अमितेश शास्त्री – पुरोहित

भक्तिमय भजन

  • पं. नरेश दत्त – आर्य भजनोपदेशक

यज्ञ पर प्रतिदिन सपत्नीक चार यजमान रहेंगे। यजमान बनने के इच्छुक 9838782306, 9501283 447, 9417460343, 9417009313, 9417009863 आर्य समाज सैक्टर 7-बी, चण्डीगढ से सम्पर्क करें ।

सायंकालीन कार्यक्रम 21.2.2024 से 24.2.2024

भक्तिमय भजन

  • सायंकाल 5:15 से 6:30 तक

प्रवचन

  • 6:30 से 7:15 तक

शोभा यात्रा शनिवार 24 फरवरी 2024 प्रातः 9:30 बजे

यज्ञ. – प्रातः 8:00 से 9:30 तक

ध्वजारोहण – प्रातः 9:30 बजे

शोभा यात्रा संयोजक – प्रकाश चन्द्र शर्मा

शोभा यात्रा आरम्भ स्थल, आर्य समाज सैक्टर 7 बी, चण्डीगढ़शोभायात्रा को मुख्य अतिथि एवं केंद्रीय आर्य सभा के प्रधान श्री रवींद्र तलवाड़ जी, केसरी झंडीदिवाकर अग्रसर करेंगे। शोभायात्रा इनकी अगुवाई में आर्य समाज सैक्टर 7 बी चण्डीगढ़ से प्रारम्भहोकर, सैक्टर 7 की मार्केट के सामने से होती हुई, पेट्रोल पंप से बाई ओर मुड़कर, सैक्टर 8बी एवं सी केबीच की सड़क से होते हुए, शिव मन्दिर – गुरुद्वारा साहिब से बायीं ओर मुड़कर सैक्टर 8 एवं 9 के बीच की सड़क से चलते हुए, मध्य मार्ग पार करके, सीधी सैक्टर 18 एवं 17 के बीच की सड़क से आगे बढत हुए, लाइट प्वाइंट से बायीं ओर मुड़कर, सैक्टर 18 जैन धर्मशाला के आगे से बढ़ते हुए, सैक्टर 18 एवं 19की मार्केट के आगे से होते हुए, मनचंदा बुक स्टोर के साथ लगते गोल चक्कर से दायीं ओर मुड़कर, आर्य समाज सैक्टर 19 में दोपहर 1 बजे सम्पन्न होगी

केन्द्रीय आर्य सभा चण्डीगढ़ के सभी अधिकारी अंतरंग सभासदस्य, सदस्य, चण्डीगढ़, पंचकूला, मोहाली के सभी आर्य समाजों के प्रधान मंत्री, सभासद, व्यक्तिगत सदस्य एवं सभी आर्य शिक्षण संस्थाओं के प्राचार्य-प्राचार्या, शिक्षक वर्ग, आर्य महिला संगठन एवं नगरत्रय के सभी आर्य बंधु

विद्वानों का परिचय

स्वामी सम्पूर्णानन्द सरस्वती जी आर्यजगत के मूर्धन्य संन्यासियों की अग्रणीय पंक्ति में गिने जाते हैं। आप अत्यन्त सरल स्वभाव के धनी एवं उच्च कोटी के अन्तराष्ट्रीय वैदिक प्रवक्ता हैं। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा गुरुकुल के शुद्ध पवित्र वातावरण में हुई। तत्पश्चात आपने दीनानगर, पंजाब से उच्च शिक्षा ग्रहण की। स्वामी जी ने अनेकों पुस्तकों की रचना की है। योग विद्या और आयुर्वेद के क्षेत्र में भी स्वामी जी ने गहन चिंतन एवं मनन किया। स्वामी जी पूरे देश एवं विदेशों में जाकर वैदिक धर्म का प्रचार-प्रसार करते हैं। समय-समय पर अनेक समाजसेवी कार्य करते रहते हैं। केवक भारत में ही नहीं अपितु नेपाल में जब भीषण भूकम्प आया तो अनेक लोग हताहत और बेघर हो गए। तब स्वामी जी ने तीन गाँवों को गोद लेकर, उनके लिए घर बनवाए तथा उनकी सम्पूर्ण रूप से देखभाल की। स्वामी जी वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ गुरुकुल, गौशाला एवं शोध संस्थान का संचालन करते हैं। आप अपने सरल स्वभाव, मृदुवाणी एवं विद्वत्ता के कारण जन मानस के कंठाभरण बन जाते हैं।

आचार्य (डॉ.) सुश्रुत सामश्रमी आपका जन्म 1978 में स्व. प्रो० डॉ. सुभाष वेदालंकार जी के घर, हरियाणा प्रान्त में हुआ। आपकी शिक्षा – एम. काम. एम.ए. संस्कृत (वेद) पी. एच. डी., व्याकरणाचार्य आदि। आप विगत २० वर्षों से भारत के विभिन्न प्रान्तों हरियाणा, दिल्ली, उत्तर-प्रदेश, मध्य-प्रदेश, पंजाब, बिहार आदि में जाकर वेद कथाओं के अन्तर्गत सहस्त्रों व्याख्यान कर चुके हैं। सन् 2014 में अमेरिका के जार्जिया प्रान्त में एक माह के प्रवास के समय वेद मंत्रों पर आधारित व्याख्यान दिए ।

सन् 2002 – 2006 तक विभिन्न गुरुकुलों में अध्यापन कार्य किया। सन् 2006 से स्नातकोत्तर महाविद्यालय पानीपत के संस्कृत विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। देश के उच्च कोटि के वैदिक विद्वानों में आपका नाम लिया जाता हैं। आप अनेकों पुस्तकों के रचनाकार भी हैं।

पं. नरेश दत्त आर्यभजनोपदेशक: आप जनपद बिजनौर (उ.प्र.) से हैं व आपका जन्म 01.11.1957 को स्वर्गीय श्री बलदेव सहाय एवं श्रीमती जमना देवी के परिवार में हुआ। आप एक उच्च कोटि के पूर्णतः समर्पित वैदिक भजनोपदेशक हैं तथा वेदप्रचार के इस कार्य में वर्ष 1973 से संलग्न हैं। वैदिक सिद्धान्तों का प्रचार प्रसार करते हुए यज्ञ व संस्कारों द्वारा मानव का नवनिर्माण करना ही आपके जीवन का ध्येय है। प्रोजेक्टर एवं रथ यात्रा से ग्रामीण क्षेत्र में वेद प्रचार से आपकी विशेष पहचान है। आप एक बहुत ही उच्च कोटि के गायक होने के साथ सुमधुर गीतों के रचनाकार भी हैं और आपकी इस विषयक अनेकों पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। निःस्वार्थ भाव से आर्यसमाज की सेवा करते हुए आपने गायकी के क्षेत्र में अपने अनेकों शिष्यों को भी तैयार किया है। आर्य समाज के प्रचार-प्रसार में समर्पित शिष्य प्रिय दिनेश दत्त, प्रिय कुलदीप आर्य, प्रिय हरिओम सरल, प्रिय भीष्म आर्य, प्रिय आर्यत एवं प्रिय अजय आर्य आपकी देन हैं। आपके इस समर्पण भाव को देखते हुए आपको आर्य गौरव, आर्यरन्न, आर्यभूषण, गौरक्षक, आर्यकवि, वैदिक मिशनरी आदि सम्मान से भी सम्मानित किया गया है।

आर्य शिक्षण संस्थाएं

स्थानीय आर्य समाजें