दयानन्द दा पता चांद तारों से पूछुंगा
दयानन्द दा पता चांद तारों से पूछुंगा ,
दहकती आग के अंगारो से पूछुंगा।
हटा के मौजों को तूफान की धारों से पूछुंगा।
दयानन्द दा …..
मेरे गमख्वार को मैं राक के
बीमारों से पूछूंगा,
पहाड़ों से चट्टानों से में
दीवारों से पूछुंगा।
दयानन्द दा …..
यही अरमान है दिल में
कि में टँकारे जाऊंगा,
ऋषि पर जो बनाये गीत
खुश होके गाऊंगा।
अगर सूरत दयानन्द की
वहां न देख पाऊंगा ,
कसम अल्लाह की खाकर
मैं खूं अपना बहाऊंगा।
तड़प कर शिव के मंदिर की
मीनारों से पूछुंगा ।
दयानन्द दा …..
मेरे गुरूवर की भक्ति की यह
आवाज दुनियां को सुनाऊंगा।
गुरूवर को गर वहां न देख पाऊंगा
तो मैं धूनी रमाऊंगा।
कसम अल्लाह की दीदार
बिन न लौट आऊंगा।
बिगड़ कर जोश में खो होश
अजमेर के दयारों से पूछुंगा।
दयानन्द दा …..










