दयानन्द गाऊँ तेरे गुण
कैसा उपकार तू कर गया
तेरा प्यार दिलों में भर गया ॥ दयानन्द गाऊँ…
तू ना आता तो ये जग संभलता नहीं
वेद के ज्ञान का दीप जलता नहीं,
धर्म बचता नहीं, आर्य जगता नहीं, युग बदलता नही,
तू जो आया समाँ बदल गया ॥ दयानन्द गाऊँ…
तू ना आया तो गौएँ भी कटती रहीं
विधवा नारी अँगारों पे जलती रहीं
ज्ञान विरान था, फैला अज्ञान था, देश निष्प्राण था,
कुप्रथाओं से मुक्त कर गया ॥ दयानन्द गाऊँ…
दासता में पड़ा था हमारा वतन
खुद की भूलों से उजड़ा था प्यारा चमन
ऋषि का इक वाक्य था, नारा स्वराज्य का, देश के भाग्य का,
रुख आजादी की ओर कर गया ॥ दयानन्द गाऊँ…
पापी दुष्टों पे भी थी दया की नज़र,
दी नसीहत सभी को, सही वक्त पर,
शुद्ध आचार था, शुद्ध व्यवहार था,
प्यार उपकार था प्रेम महर्षि का जादू कर गया ॥ दयानन्द गाऊँ…
था समन्दर सा दिल दयानन्द तेरा
कर सका ना ऋषि तेरा कोई बुरा
घातक नादान था, उसको ना भान था, तू दयावान था
क्षमा विषदाता को कर गया ॥ दयानन्द गाऊँ…
तेरे गुण तो ये वाणी कह सकती नहीं,
बिने कहे भी ये चुप रह सकती नहीं,
ईश-वरदान था, प्रतिभावान था, धर्म का प्राण था,
नाम अपना अमर कर गया । दयानन्द गाऊँ…










