दाता तेरी प्रीति का सुख है निराला (तर्ज- झिलमिल सितारों का..)
दाता तेरी प्रीति का सुख है निराला,
अमृत पीवें कोई कर्मा वाला।
दाता तेरे दर का जो है भिखारी,
आशा तृष्णा मिटे मन की सारी
प्रभु चरणों में मन होवे मतवाला ।।
अमृत…
प्रेम का दीपक, प्रेम की बाती,
जग-मग ज्योति जले दिन राती।
मन मन्दिर में करो उजियाला।।
अमृत…
तेरे बिना दाता और न कोई,
रहमत बिन घर और न कोई।
साफ करो मेरा मन है काला।।
अमृत…
दासन दास का देना सहारा,
भव सागर से पार उतारा।
करो कृपा ओ दीन दयाला।।
अमृत…










