मंत्रः

सरलभाषा संस्कृतं

आइये एक कदम संस्कृत की ओर ,संस्कृति की ओर और वेद की ओर चलते है। सरलभाषा संस्कृतं सरसभाषा संस्कृतम् ।सरस-सरल-मनोज्ञ-मङ्गल-देवभाषा संस्कृतम्...
ओ३म्।आपो हि ष्ठा मयोभुवस्ता न ऊर्जे दधातन।महे रणाय चक्षसे ।।१।।अथर्ववेद १.५.१ भावार्थ- ये जल सुख प्रदान करने वाले, बल-उत्साह प्रदान करने...
ओ३म्। प्रातरग्निं प्रातरिन्द्रं हवामहे प्रातर्मित्रावरुणा प्रातरश्विना। प्रातर्भगं पूषणं ब्रह्मणस्पतिं प्रात: सोममुत रुद्रं हुवेम ।।१।। हम प्रतिदिन प्रात:= प्रभात बेला में अग्निम्= स्वप्रकाशस्वरूप इन्द्रम्=...
पहले जल आदि से शरीर की शुद्धि करें फिर राग-द्वेष आदि के त्याग से भीतर की शुद्धि करनी चाहिए।फिर कम...
हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्॥ स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम ॥ १ ॥ भावार्थ: हे देव! सूर्य आदि...
अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् ।होतारं रत्नधातमम् ॥१॥ मैं अग्नि की स्तुति करता हूँ, जो यज्ञ के महापुरोहित हैं, दिव्य हैं,...
ध्वजेयं मुदा वर्धते व्योमवातैः , समुड्डीमानान्तरिक्षे विशाले । महामण्डले दीप्त दिव्यारुणाभे , सुभासैर्रवेर्भासते ओ३म् पताका ।। प्रबुद्धार्यवर्तैक देशे प्रशस्ता , समस्तार्य वीरैर्धृता...
यजुर्वेद का 31 वां अध्याय (पुरुष सूक्त) सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्स भूमिं विश्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्दशाङुलम् ॥१॥ पुरुष एवेदं सर्वं यद्भूतं यच्च भव्यम् ।उतामृतत्वस्येशानो...
आचमन मंत्र निम्न तीन मंत्र से एक-एक करके आचमन करेंगे (जल पियेंगे)। ओं अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा ॥१॥ ओं अमृतापिधानमसि स्वाहा ॥२॥ ओं सत्यं यशःश्रीर्मयि श्रीः...
ऋग्वेद का 10वाँ मंडल का 129वाँ सूक्त नास॑दासी॒न्नो सदा॑सीत्त॒दानीं॒ नासी॒द्रजो॒ नो व्यो॑मा प॒रो यत् ।किमाव॑रीवः॒ कुह॒ कस्य॒ शर्म॒न्नम्भः॒ किमा॑सी॒द्गह॑नं...
ओ३म् द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:,पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: । वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि ॥ॐ शान्ति:...
ओ३म् आ ब्राह्मन ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायतामा राष्ट्रे राजन्यः शूरऽईषव्योऽतिव्याधी महारथो जायतां दोग्ध्री धेनुर्वोढानाव्डानाशुः सप्तिः पुरंधिर्योषा जिष्णु रथेष्ठाः सभेयो युवास्य यजमानस्य...
यज्जाग्रतो दूरम् उदैति दैवं तद् उ सुप्तस्य तथैवैति ।दूरंगमं ज्योतिषां ज्योतिर् एकं तन् मे मनः शिवसंकल्पम् अस्तु प्रभो! जागते हुए सदा जो, दूर-दूर...
त्र्यंबकम् यजामहे सुगंधिम पुष्टि: वर्धनम्।उर्वारुकमिव बंधनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।  भावार्थ हे ईश्वर !हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें जैसे खीरा इस बेल...
janeu
ओ३म् यज्ञोपवीतं परमं पवित्रम् प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।आयुष्यमग्रयं प्रतिमुंच शुभ्रं यज्ञोपवीत बलमस्तु तेज:।। ओ३म् यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्य त्वोपवीतेनोपनह्यामि । अर्थ “हे प्रजापति! यह यज्ञोपवीत परम पवित्र है।...
bhojan mantra
ओ३म् अन्नपते अन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः। प्र प्र दातारं तारिष ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे ।। नः – हम/हमारे | अन्नपते – अन्न के स्वामी...
ऋग्वेद के दशम मंडल में वर्णित संगठन सूक्त ऊँ संस॒मिद्युवसे वृष॒न्नग्ने॒ विश्वा॑य॒र्य आ।इळस्प॒दे समिध्यसे स नो॒ वसून्या भर॥ 1॥ अर्थ-हे धर्मनिरत विद्वानों...