मंत्रः
ओ३म्। प्रातरग्निं प्रातरिन्द्रं हवामहे प्रातर्मित्रावरुणा प्रातरश्विना। प्रातर्भगं पूषणं ब्रह्मणस्पतिं प्रात: सोममुत रुद्रं हुवेम ।।१।।
हम प्रतिदिन प्रात:= प्रभात बेला में अग्निम्= स्वप्रकाशस्वरूप इन्द्रम्=...
पहले जल आदि से शरीर की शुद्धि करें फिर राग-द्वेष आदि के त्याग से भीतर की शुद्धि करनी चाहिए।फिर कम...
हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्॥
स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम ॥ १ ॥
भावार्थ: हे देव! सूर्य आदि...
अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् ।होतारं रत्नधातमम् ॥१॥
मैं अग्नि की स्तुति करता हूँ, जो यज्ञ के महापुरोहित हैं, दिव्य हैं,...
गायत्री मन्त्र:
ओ३म् भूर्भुव:स्व:। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। घियो यो न: प्रयोदयात।।
गायत्री मन्त्र में प्रथम जो (ओ3म) है यह ओंकार...




