दर्शन योग धर्मार्थ ट्रस्ट की अद्भुत पुस्तक प्रकाशन योजना
(वैदिक संस्कृति के संरक्षण व प्रसार हेतु एक महत्वपूर्ण कदम)
दर्शन योग धाम, लाकरोड़ा, माणसा, जिला गांधीनगर (गुजरात) द्वारा संचालित दर्शन योग धर्मार्थ ट्रस्ट ने वैदिक संस्कृति और भारतीय दर्शन के प्रचार-प्रसार हेतु एक सशक्त पुस्तक प्रकाशन योजना का शुभारंभ किया है। यह योजना 40 वर्षों से चली आ रही निरंतर साधना और वैदिक विद्वानों की तपस्या का परिणाम है।
पुस्तक प्रकाशन की परंपरा
स्वामी सत्यपति जी परिव्राजक द्वारा स्थापित दर्शन योग महाविद्यालय रोज़ड विगत चार दशकों से वैदिक ग्रंथों के प्रकाशन व वितरण में संलग्न है। यहां से प्रकाशित पुस्तकों में शामिल हैं:
- स्वामी सत्यपति जी, स्वामी विवेकानन्द जी, आचार्य ज्ञानेश्वर जी, स्वामी ध्रुवदेव जी, स्वामी ब्रह्मविदानन्द जी, स्वामी शान्तानन्द जी आदि महान विद्वानों द्वारा लिखित ग्रंथ।
नवप्रकाशित पुस्तकों की सूची
संस्थान द्वारा हाल ही में कई नव पुस्तकें प्रकाशित की गई हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- व्यवहारभानु प्रकाश – स्वामी विवेकानन्द जी
- ब्रह्मचर्य महिमा, वेदार्थ-प्रतीति भाग 2 – स्वामी ध्रुवदेव जी
- આર્યોદશ્યરત્નમાલા, न्याय दर्शन सार, योग दर्शन परिचय, सांख्य दर्शन सार, वेदान्त विद्या प्रश्नोत्तरी आदि
इन पुस्तकों के मूल्य 18 रुपए से लेकर 88 रुपए तक हैं, तथा यह क्राउन, डेमी, ब्राउन जैसे विविध साइज में उपलब्ध हैं।

पुनर्प्रकाशन योजना
कुछ पुरानी महत्वपूर्ण पुस्तकें जैसे
- फेसबुक शंका समाधान – स्वामी विवेकानन्द जी
- सत्योपदेश (भाग 1 व 2) – स्वामी सत्यपति जी
- सरल योग से ईश्वर साक्षात्कार, ब्रह्मविज्ञान (गुजराती)
- अपने भाग्य निर्माता आप, वेदवाणी
इनका पुनः मुद्रण भी प्रस्तावित है।
दानियों के लिए सहयोग का आह्वान
ट्रस्ट ने समाज के सज्जनों से इस ज्ञान यज्ञ में आहुति देने की अपील की है। इच्छुक व्यक्ति एक, दो अथवा सभी टाइटल की 25, 50, 100, या 200 प्रतियों के लिए सहयोग दे सकते हैं। दान देने वाले महानुभावों का नाम पुस्तक पर छापा जाएगा।
आप निम्नलिखित माध्यमों से सहयोग भेज सकते हैं:
- QR कोड स्कैन करके
- बैंक ट्रांसफर द्वारा
- A/c Name: Darshan Yog Dham
- A/c No: 01790100055023
- IFSC: BARBODHANSU
- बैंक शाखा: धानसुरा
सहयोग भेजने के बाद कृपया मोबाइल नंबर 9409615011 पर जानकारी साझा करें।
समाप्ति संदेश
“आपका छोटा सा योगदान भी समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। वैदिक ज्ञान के इस दिव्य यज्ञ में अपनी यथासंभव आहुति अवश्य दें।”
वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना के साथ,
आचार्य दिनेशकुमार, अध्यक्ष
श्री शशिकान्त आर्य, संयोजक – पुस्तक प्रकाशन विभाग
darshanyog@gmail.com | www.darshanyog.org
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