बिन माँगे सब मिला है क्या और माँगता
दाता प्रभु तू दानी सब कुछ है जानता ॥ विन मांगे…
तेरे सूर्य चन्द्र तारे पल पल चलें इशारे
करें नाश अँधियारे जग में करे उजियारे
प्रभु तू स्वयं प्रकाशित ये जग है जानता ॥ बिन मांगे..
फल फूल से सजी है हरियालियों में धरती
हर जीव मात्र का ये निष्काम कर्म करती
जाने ललित कलाएँ माली जहान का ॥ बिन मांगे…
प्रहरी बनाए पर्वत हर देश के ये रक्षक
बहकर के प्रेम नदियाँ जाएँ प्रेम सागरों तक
प्रभु सोम इन्द्ररूप से जग को है पालता ॥ विन मांगे…
तल से उठा के जल को थल ही पे बरसाए
बनके बृहस्पति प्रभु उपकार करता जाए
हर दान ईश तेरी महिमा उभारता ॥ बिन मांगे…
हर इक जगत का प्राणी महादान से अछूता
सदियों से पा रहा है प्रभु प्रेम ये अनूठा
रहे ना भण्डार खाली हर पल जो बाँटता ॥ बिन मांगे..
तू प्रकाश पुज्ज है मैं प्रकाश तुझसे माँगू
तू है ज्ञान का भण्डारी तेरे ज्ञान को मैं साधूँ
तेरे वेद ही बताएँ अमृत का रास्ता ॥ बिन मांगे…
(प्रहरी) पहरा देनेवाला (अछूता) पवित्र, जिसे छुआ न जा सके, पहुँच के बाहर (अनूग)
तर्ज: सारे मला मिळाले










