बिना धर्म के राजनीति एक खेल हुआ भारत में।
बिना धर्म के राजनीति
एक खेल हुआ भारत में।
लोकतंत्र अनरीति से ही
फेल हुआ भारत में ॥
त्याग और तप से रहित
यहाँ पर जिनका जीवन होता है।
सांसद सीट विधायकी को
उनका नामांकन होता है॥
भ्रष्ट विचारों वालों का हर
दिन गठ-बंधन होता है।
आता नहीं बसन्त बिना
वर्षा के सावन होता है॥
चोर-चोर मोसेरों का ही
मेल हुआ भारत में ॥1॥
जातीयता मतभेदों की ही
बात अब बढ़ती जाती है।
सत्य के वृक्ष पै झूठ के
विष की बेल ही चढ़ती जाती है॥
कलश पै पीतल के कंचन की
परत ही मढ़ दी जाती है।
इसीलिये तो घटक नीति
बदबू से सड़ती जाती है॥
उद्दंडता का ऊँट अब बिना
नकेल हुआ भारत में ॥2॥
आशा लगाये बैठे थे आशा की
किरण कोई दिख जाये।
सदियों का अन्धेर मिटे
उम्मीद का सूरज उग जाये ॥
राम राज्य की कल्पना के
कोई पृष्ठ दोबारा लिख जाये।
दरिद्रता का सड़ा वस्त्र दुखियों का
उतरकर फिक जाये॥
मगर स्वर्ग का स्वपना नर्क की
जेल हुआ भारत में ॥3॥
पूंजीपति सामन्तों के ही
भरे हैं चावल गालों में।
महा बैंक का ऋण तक भी
बंटकर रह गया दलालों में।
आश्चर्य बापू गांधी तेरे
चेले लिप्त घोटालों में।
कर्मठ है अभिशाप देश
डूबा मदिरा के प्यालों में॥
अपहरण कत्ल कुर्सी के
लिये फ्री सेल हुआ भारत में ॥4॥










