भगवान् मेरे मन का अन्धकार दूर कर दो

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भगवान् मेरे मन का अन्धकार दूर कर दो

भगवान् मेरे मन का
अन्धकार दूर कर दो
दो ज्ञान का उजाला
अज्ञान दूर कर दो

तुम से मिलन के वास्ते
दर-दर भटक रहा हूँ
मिल जाओगे कहीं तुम
आशा में जी रहा हूँ
अपनी शरण में लेकर
मुझको निहाल कर दो
दो ज्ञान का उजाला
अज्ञान दूर कर दो
भगवान् मेरे मन का
अन्धकार दूर कर दो
दो ज्ञान का उजाला
अज्ञान दूर कर दो

अब छोड़ के तेरा दर
जाऊँ कहाँ मैं भगवन्
दुनिया की उलझनों में
लगता नहीं मेरा मन
सन्सार के भँवर से
तुम मुझको पार कर दो
दो ज्ञान का उजाला
अज्ञान दूर कर दो
भगवान् मेरे मन का
अन्धकार दूर कर दो
दो ज्ञान का उजाला
अज्ञान दूर कर दो

सारी उमर बिता दी
शुभ कर्म कुछ किया ना
अब आखिरी घड़ी है
कुछ भी समय बचा ना
शुभ कर्म के लिए कुछ
जीवन उधार दे दो
दो ज्ञान का उजाला
अज्ञान दूर कर दो
भगवान् मेरे मन का
अन्धकार दूर कर दो
दो ज्ञान का उजाला
अज्ञान दूर कर दो

सन्सार से बेगाने
जब द्वार तेरे आऊँ
मेरे प्रभु तुम्हारे
चरणों में ठौर पाऊँ
विनती “सरोज” की तुम
भगवन् कबूल कर लो
दो ज्ञान का उजाला
अज्ञान दूर कर दो
भगवान् मेरे मन का
अन्धकार दूर कर दो
दो ज्ञान का उजाला
अज्ञान दूर कर दो