बातें जो बनाया करते हैं

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क्या जाने

(तर्ज-आँखों में खुशी छा जाती है)

बातें जो बनाया करते हैं
वो करके दिखाना क्या जानें।
करने की लगन जिनके मन में
वो बातें बनाना क्या जानें।
बातें जो बनाया करते हैं………..

१. जो गरज गरज कर आते हैं
वो कम ही बरसते देखे हैं।
और उछल उछल चलने वाले
राहों में ही बसते देखे हैं।
हिम्मत ही नहीं जिन पांओं में
वो मंज़िल को पाना क्या जानें।
बातें जो बनाया करते हैं……..

२. जहाँ जुल्मो सितम के साए में
अरमान दिलों के पलते हैं।
वहाँ वीर हकीकत से फिर भी
सर ऊँचा उठा के चलते हैं।
मंजूर है सर कटवा लेना पर
सर को झुकाना क्या जानें।
बातें जो बनाया करते हैं……….

३. दुःख के बदले सुख आन मिले
दुनियाँ का ‘पथिक’ यह असूल कहाँ।
तुमने तो दिये काँटे सब को
बदले में मिलेंगे फूल कहाँ।
शीशे घर वाले दूसरों पर
पत्थर बरसाना क्या जानें।
बातें जो बनाया करते हैं……….