बसा लूँ प्रभु प्यार मन में तेरा
बसी है खुशबू जैसे सुमन की
यूँ बन के साथी रहूँ मैं तेरा
है मीन जैसे नदी के जल की ॥ बसा लूँ प्रभु ..
है भाग्य मेरा मिला है नरतन
लगाया इसमें ये मन का दर्पण रखूँ अगर साफ मैं जतन से
तो देखें ज्योति प्रभु किरण की ॥ बसा लूँ प्रभु….
हे साँसों में प्रभुजी तेरी ही धड़कन
जो गाती रहती तेरी ही सरगम
तुझे बना लूँ मैं अपना प्रीतम
हैं आस मुझको तेरे मिलने की ॥ बसा लूँ प्रभु ..
शरण भी तेरी तेरे ही चरनन
दया में तेरी जिऊँगा हरदम
मैं वाएँ तुझपे मेरा ये तन मन
है भक्ति जागी तेरे भजन की ॥ बसा लूँ प्रभु…
जो कुछ है मेरा करूँ समर्पण
केवल मैं पाऊँ तेरा रतन धन
बिना तेरे क्या है मेरा जीवन
है प्रीत तुझसे जनम जनम की ॥ बसा लूँ प्रभु …










