बैठ दो घड़ी कर, प्रभु का भजन

0
61

बैठ दो घड़ी कर, प्रभु का भजन

बैठ दो घड़ी कर, प्रभु का भजन
बन्धनों से बच ले, कर के यतन
बैठ दो घड़ी कर, प्रभु का भजन

रचा जिसने सुन्दर, ये संसार सारा
जगत् में उसी का, है सब पसारा
गीत गा उसी के, तू हो कर मगन
बैठ दो घड़ी कर, प्रभु का भजन
बन्धनों से बच ले, कर के यतन
बैठ दो घड़ी कर, प्रभु का भजन

दया से है उसकी, मनुष्य देह पाई
तेरे भोग की सारी, चीजें बनाई
किया कितना उपकार, जरा कर मनन
बैठ दो घड़ी कर, प्रभु का भजन
बन्धनों से बच ले, कर के यतन
बैठ दो घड़ी कर, प्रभु का भजन

तृष्णा न होगी, कभी मन की पूरी
करो लाख कोशिश, रहती अधूरी
सन्तोष सम ना, कोई और धन
बैठ दो घड़ी कर, प्रभु का भजन
बन्धनों से बच ले, कर के यतन
बैठ दो घड़ी कर, प्रभु का भजन

अगर चाहता है, तू उद्धार अपना
बना ले प्रभु को ही, आधार अपना
मधुर जिन्दगी में, खिलेंगे सुमन
बैठ दो घड़ी कर, प्रभु का भजन
बन्धनों से बच ले, कर के यतन
बैठ दो घड़ी कर, प्रभु का भजन

स्वर :- पण्डित श्री दिनेश दत्त शर्मा जी