बह रहा है सप्त सिन्धुओं का प्रवाह

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बह रहा है सप्त सिन्धुओं का प्रवाह

बह रहा है सप्त सिन्धुओं का प्रवाह
मेघों का कर संहार देता जल को राह
वेगवती नदियों का यह जल का भण्डार
वह तो इन्द्र प्रभु का है असीम उपहार
नदियों में उमड़ता है लहरों का प्यार
आओ हृदय से करें इन्द्र को नमस्कार
बह रहा है सप्त सिन्धुओं का प्रवाह
मेघों का कर संहार देता जल को राह

कहाँ ऐसा दीर्घ पात्र जो लाकर रखें
जो गगन में असीम जल लेके उठे
ना तो लोक-लोकांतर में इन्द्र देव सा
हुआ ना, ना होगा ऐसा दिव्यांश दातार
बह रहा है सप्त सिन्धुओं का प्रवाह
मेघों का कर संहार देता जल को राह

जल लेकर सूर्य किरणें नभ में उड़े
बार-बार बरसे हरियाली खिले
इन्द्र के प्रति कृतज्ञ हम सब रहें
केवल कृतज्ञता का दे सकें उपहार
बह रहा है सप्त सिन्धुओं का प्रवाह
मेघों का कर संहार देता जल को राह

सूर्य चन्द्र की गौएं मेघ ले छुपा
मेघ का संहार कर गौएं ली छुड़ा
और फिर प्रकाश पुञ्ज प्रसरता चला
कौन करें उसके बिन प्रकाश का प्रसार
बह रहा है सप्त सिन्धुओं का प्रवाह
मेघों का कर संहार देता जल को राह

मेघों के संघर्ष से विद्युत चमक उठे
धरती-गगन प्रकाश से उज्जवल करे
विद्युत को क्यों ना हस्तगत कर लें?
हे इन्द्र! तेरा बल है अनन्त अपार
बह रहा है सप्त सिन्धुओं का प्रवाह
मेघों का कर संहार देता जल को राह

संघर्षों युद्धों में इन्द्र है अजय
उसकी कृपाएँ बरसती हर समय
संकटों का कर सकता है वही विलय
इन्द्र सम्राट है ऐश्वर्यों का भण्डार ‌


बह रहा है सप्त सिन्धुओं का प्रवाह
मेघों का कर संहार देता जल को राह
वेगवती नदियों का यह जल का भण्डार
वह तो इन्द्र प्रभु का है असीम उपहार


नदियों में उमड़ता है लहरों का प्यार
आओ हृदय से करें इन्द्र को नमस्कार
बह रहा है सप्त सिन्धुओं का प्रवाह
मेघों का कर संहार देता जल को राह