जग में जिए सबके लिए देव दयानन्द का यह आर्य समाज ।
जग में जिए सबके लिए देव दयानन्द का यह आर्य समाज । तर्ज: मैं हूं गंवार मुझे सब से है […]
जग में जिए सबके लिए देव दयानन्द का यह आर्य समाज । तर्ज: मैं हूं गंवार मुझे सब से है […]
बालुकण वर्षा की बूंदे तर्ज – बेशक मन्दिर मस्ज़िद तोड़ो बुल्लेशाह यह कहता बालुकण वर्षा की बूंदे,ये आकाश के तारे
ए ऋषि याद आए ज़माना तेरा । तर्ज – साथिया नहीं जाना के जी न लगे ए ऋषि याद आए
ऋषि ने जलाई है जो दिव्य ज्योति तर्ज – यह माना मेरी जां मुहब्बत सज़ा है ऋषि ने जलाई है
गुरुदेव प्रतिज्ञा है मेरी पूरी करके दिखला दूँगा । तर्ज-है प्रीत जहां की रीत सदा गुरुदेव प्रतिज्ञा है मेरीपूरी करके
बारहीं बरसीं खट्टन गया तेखट्ट के लयाया चाये । 1 बारहीं बरसीं खट्टन गया तेखट्ट के लयाया चाये ।महा ऋषि
दया व आनन्द का भण्डार दयानन्द थे। दया व आनन्द का भण्डार दयानन्द थे।दिव्य शक्तियों का चमत्कार दयानन्द थे। अग्नि
वेदों वाले ऋषिवर तेरी शान का तर्ज – बहर तवील वेदों वाले ऋषिवर तेरी शान कासारी दुनियां में कोई बशर
एक तरफ था देव दयानन्द तर्ज – एक ताल पर तोता बोले एक तरफ था देव दयानन्द ,एक तरफ जग
गोलियां सीने पे खाके चल दिये । तर्ज – दिल के अरमाँ गोलियां सीने पे खाके चल दिये ।प्यास कातिल
मधुर वेद वीणा बजाते चलेंगे ।। मधुर वेद वीणा बजाते चलेंगे ।।सोते हुओं को जगाते चलेंगे ।रोते हुओं को हंसाते
दयानन्द दा पता चांद तारों से पूछुंगा दयानन्द दा पता चांद तारों से पूछुंगा ,दहकती आग के अंगारो से पूछुंगा।हटा
आ लौट के आजा दयानन्द आ लौट के आजा दयानन्द,तुझे हम आज बुलाते हैतेरा महका हुआ है गुलशन,तुझे हम आज
एक जंगल में नई बस्ती बसा दी तूने । एक जंगल में नई बस्ती बसा दी तूने ।वक्ते पत्थर पे
योगी आया था वेदों वाले किया उजियाला। योगी आया था वेदों वाले किया उजियाला।दुनिया में सच्चे ज्ञान का,वो तो देवता