(१)🌹🌺🪴
ओरों का जो धन छीने,
वह बीज पाप के बोता है।
पर स्त्री,स्त्री सम् समझे,
मानव जीवन खोता है।
मित्रों पर संदेह करे वह,
मूंड पकड़ कर रोता है,
इनको”धर्मी”जो जन करता,
नाश शीघ्र ही होता है।
(२)🌹🪻🎄
लज्जा मिट जाये वहां से,
जहां कंगाली आती है।
कार-बार सब ठप्प होंय,
और चिंता अधिक सताती है।
जिसके कारण बुद्धि भी फिर,
काम नहीं कर पाती है
“धर्मी”सर्वनाश होता है,
बुद्धि जब मिट जाती है
(३)🪻🌷
झूंठ बोलने से तो”धर्मी”
चुप रह जाना अच्छा है
दुष्ट जनों के हलवा खीर से,
सुखा खाना अच्छा है।
भिक्षा वृत्ति के जीवन से,
प्राण गवाना अच्छा है,
पर पुरुषों से मिलने से तो,
रांड कहाना अच्छा है।
(४)🪴🌺🌷
आपत्ती में होत परीक्षा,
मित्र के मित्रताई की।
निर्धनता में होत परीक्षा,
अपनी खास लुगाई की
दु:ख पडने पर होत परीक्षा,
मां के जाये भाई की,
“धर्मीं” जन की होत परीक्षा,
ऋण की करी सहाई की।










