“अति निद्रा ना अती भोजन,ना अधिक कभी स्नान करे”स्वस्थ्य संबंधित भजन

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(१)🌺☝🪴🌹
अति निद्रा ना अती भोजन,
ना अधिक कभी स्नान करे।
नहीं जागरण कभी करे ना,
दुखियों का अपमान करे।
नहीं लोभ के वश में हो,
ना भय और शोक का ध्यान करे।
“धर्मी” ऐसा ब्रह्मचारी ही,
प्राप्त वेद का ज्ञान करे।

(२)🪴💐🌹🌺
जिस तन स्वर्णाभूषण थे,
उसके तन कान ना बाली रही।
जिस दीन दुखी धनवान् किये,
उनके घर थाल ना थाली रही।
“जिनके कभी धेनु से घेर भरे,
उनके अब भेड न काली रही।
जिनके बहू बाग तड़ाग रहे,
उनके कहूं कूप ना नाली रही।

(३)🌺🌹🙏🌲
नीर बिना सूना सरवर है,
द्रव्य बिना सूना परिवार।
दान बिना सूनी सम्पत्ति,
सत्य बिना सुना व्यवहार।
प्रेम बिना सूनी सुंदरता,
स्वास्थ्य बिना सूना श्रृंगार।
धर्म बिना सुना है “धर्मी”
ज्ञान बिना सुना संसार।

(४)🌲🌺🌹🪴
मनुष्य को शोभित बाजूबंद ना,
ना शोभित मणिहार करे।
ना शोभित हो पुष्पमाल से,
ना शोभित श्रृंगार करे।
ना शोभित हो श्याम केश से,
मांग चाहे दो चार करे।
शोभित होता वाणी से,
जो वाणी का संस्कार करे।