आर्यों का विशेष पर्व श्रावणी उपाकर्म के अवसर पर उपनयन व वेदारम्भ संस्कार

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सादर नमस्ते जी,

श्रावणी उपाकर्म आर्यों का विशेष पर्व वैदिक धर्म के मूल आधार ईश्वरीय वाणी वेद से जुड़ने का विशेष दिन है।

इस अवसर पर उपनयन व वेदारम्भ संस्कार भी किए जा रहे हैं।

आप सभी को जानकर हर्ष का अनुभव होगा कि आपके अपने *वानप्रस्थ साधक आश्रम, आर्यवन, रोजड़* द्वारा संचालित *आर्ष गुरुकुल के 35 ब्रह्मचारियों का उपनयन व वेदारम्भ संस्कार* इस श्रावणी पूर्णिमा के दिन प्रतिवर्ष की भाँति निश्चित किया है।

 *(तदनुसार सोमवार, दिनांक 19/08/2024)*

इन वैदिक संस्कारों के पश्चात् विद्यार्थी आधिकारिक ब्रह्मचारी बन जाता है। इन दोनों संस्कारों के बाद ब्रह्मचारी वेद पढ़ने का अधिकारी बनता है। ये संस्कार ही इन्हें संकल्पित करते हैं व कर्तव्य का स्मरण भी कराते हैं।

 *श्रावणी के दिन सब आर्यजन अपना पुराना यज्ञोपवीत बदलते हैं, नया धारण करते हैं।* आश्रम के सुरम्य पवित्र स्थल पर वेद मंत्रों के शुद्ध उच्चारण के साथ आप भी अपना यज्ञोपवीत बदल सकते हैं, नया धारण कर सकते हैं। *वेद व स्वाध्याय से अपने को जोड़ने व दृढ़ करने के लिए यह सुंदर अवसर है।*

*इस समारोह में आप सभी श्रेष्ठजन ब्रह्मचारियों को अपना आशीर्वाद व शुभकामनाएँ देने हेतु भी सादर आमन्त्रित हैं।*

संस्कार के अन्त में सभी ब्रह्मचारी भिक्षा लेने सभी अतिथियों के पास आयेंगे । आप अपने सामर्थ्य अनुसार उन ब्रह्मचारियों को फल, धन, आशीर्वाद आदि अर्पित कर प्रोत्साहित कर सकते हैं ।

अगले ही दिन से पुनः ब्रह्मचारियों का अध्ययन यथावत् आरम्भ हो जाएगा। संस्कार के दिन विश्राम के उपरांत 01:30 से 03:30 इन दो घण्टों में अभिभावक अपने पुत्रों से मिल सकेंगे।

 *कार्यक्रम – प्रातः 07:30 से 11:30 तक रहेगा।*

 *12:00 बजे से सब के लिए प्रीति भोज की व्यवस्था है।*

अतिथि महानुभावों से निवेदन है की कृपया पूर्व सूचना में आप आने जाने का समय अवश्य सूचित करें।

*कार्यक्रम का सीधा प्रसारण आश्रम के यूट्यूब चैनल पर किया जायेगा*