
सोनीपत, 28 जनवरी: आज आर्यवीर दल सोनीपत द्वारा संचालित दिल्ली विद्यापीठ शाखा में महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय जी की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर वैदिक लोक कल्याण न्यास द्वारा संचालित आर्योदय गुरुकुल के ब्रह्मचारी अजय आर्य ने उपस्थित आर्यवीरों को लाला लाजपत राय जी के जीवन और उनके राष्ट्रनिर्माण में दिए गए योगदान के बारे में विस्तार से बताया।
लाला लाजपत राय का राष्ट्र के प्रति समर्पण
ब्रह्मचारी अजय आर्य ने कहा कि लाला लाजपत राय का जीवन राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान की भावना से परिपूर्ण था। वे पंजाब केसरी के नाम से प्रसिद्ध थे और आर्य समाज के विचारों से अत्यधिक प्रभावित थे। उनका मानना था कि जब तक देश के नागरिक शिक्षित, संगठित और आत्मनिर्भर नहीं बनते, तब तक भारत स्वतंत्र नहीं हो सकता। इसी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने DAV स्कूलों के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में योगदान
लाला लाजपत राय ने भारतीयों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की स्थापना की, ताकि भारतीय उद्यमियों को विदेशी बैंकों की निर्भरता से मुक्त किया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने समाज में वैचारिक क्रांति लाने के लिए “आर्य गजट” समाचार पत्र का संपादन और प्रकाशन किया।

साइमन कमीशन का विरोध और बलिदान
भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए लाला लाजपत राय ने 1928 में साइमन कमीशन के विरोध में एक विशाल आंदोलन का नेतृत्व किया। इस दौरान ब्रिटिश पुलिस ने उन पर बर्बर लाठीचार्ज किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने कहा था—
“मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की कील बनेगी।”
कुछ ही दिनों बाद 17 नवंबर 1928 को उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया। उनके बलिदान से प्रेरित होकर भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने लाला जी पर लाठीचार्ज के दोषी पुलिस अधिकारी जेम्स स्कॉट से बदला लेने का संकल्प लिया और उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा दी।

राष्ट्रीयता और वैदिक विचारधारा का संदेश
इस कार्यक्रम में सभी आर्यवीरों को राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और वैदिक विचारधारा पर चलने का संकल्प दिलाया गया। वक्ताओं ने बताया कि लाला लाजपत राय का जीवन हमें निडरता, आत्मनिर्भरता और सेवा भाव का संदेश देता है।
कार्यक्रम का समापन एवं प्रसाद वितरण
कार्यक्रम के अंत में सभी आर्यवीरों को राष्ट्रीयता का संदेश देते हुए वैदिक मंत्रोच्चारण और राष्ट्रगान के साथ सभा संपन्न हुई। इसके पश्चात सभी उपस्थितजनों में प्रसाद वितरण किया गया।
इस कार्यक्रम में आर्यवीर दल के प्रमुख पदाधिकारियों, छात्रों और समाजसेवियों ने भाग लिया और लाला लाजपत राय के महान विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
यह आयोजन लाला लाजपत राय के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रयास था, जिससे युवा पीढ़ी उनके बलिदान और आदर्शों से प्रेरणा ले सके।










